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Jun10

गुड़ क्या है-About Jaggery

गुड़ गन्ने से तैयार एक शुद्ध, सेहतमंद और स्वादिष्ट पदार्थ होता है. ये मूल रूप से गन्ने के रस से तैयार किया जाता है. इसे रक्ताल्पता/अनीमिया के मरीजों को दिया जाता है. ये आयरन, मेग्नीशियम, ग्लूकोस और सुक्रोस का अच्छा सोर्स है. ऐसा कहते हैं कि इसके सेवन से मॉस पेशियों की थकान दूर होती है .इसमें सोडियम की कम मात्रा होती है व पोटाशियम कि अच्छी मात्रा होती है जिससे उच्चरक्त चाप में फायदा होता है. गुड़ में सेलेनियम होता है और यह एक एंटीओक्सिडेंट का काम करता है. ये गले और फेफड़े के इन्फेक्शन में लाभदायक होता है. इसमें खनिज और विटामिन भी होते हैं. अपने रोगियों को मैं गुड़ का सेवन करने की सलाह देता हूँ. क्योंकि आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार यह बहुत लाभदायक है. इसका मैंने अनेक रोगियों पर प्रत्यक्ष अनुभव भी किया है. मेरा मानना है कि अलग अलग रोगों में रोगी दवा लेने के साथ साथ नीचे बताए गए उपाय अपनाएँ तो उनके रोग में जल्दी ही लाभ होगा.

 आयुर्वेद के अनुसार गुड़ का प्रयोग-Jaggery Benifits

आयुर्वेद का मानना है कि गुड़ में मौजूद क्षार शरीर में मौजूद अम्ल (एसिड) को खत्म करता है इसके विपरीत चीनी के सेवन से अम्ल बढ़ जाता है । रोगरहित और दीर्घायु रहने के लिए भोजन के बाद नियमित रुप से 20 ग्राम गुड़ का सेवन किया जाना चाहिए। दूध में गुड़ मिलाकर पीना मना किया गया है। हालांकि पहले गुड़ खाएं और फिर दूध पिएं, आपकी सेहत ठीक रहेगी और कई रोगों से बचाव होगा। एक वर्ष पुराना गुड़ हल्का, अग्निवर्धक और मोटापे को कम करने वाला होता है। ये ज्वर का नाश करने वाला  होता है।गुड़ का सेवन करने से स्वास्थ्य उत्तम होता है। कड़ी मेहनत करने वाले व्यक्ति को थकान मिटाने के लिये गुड़ का शर्बत पीना चाहिये। सर्दियों में लोग गुड़ की चाय पीते हैं क्यों कि इस मौसम में गुड़ की चाय पीना काफी लाभदायक होता है। गुड़ के सेवन करने से शरीर में स्फूर्ति आती है।

विभिन्न रोगों में गुड़ के फायदे-Jaggery use as Ayurveda

१. जुखाम-

गुड़ और तिल मिलाकर बर्फी बनाकर खाने से सर्दी में जुखाम परेशान नहीं करता है।

२. गैस-

भोजन के बाद गुड़ खाने से पेट में गैस नहीं बनती है।

३.पीलिया -

दस ग्राम सौंठ, बीस ग्राम गुड़ के साथ मिला लें .इसे दो भागों में बाँट लें .सुबह शाम दो टाइम लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

४. अस्थमा -

पांच ग्राम गुड़ को सामान भाग सरसों के तेल में मिलाकर खाने से अस्थमा रोग में फायदा होता है.

५. नेत्र रोग -

बाजरे की खिचड़ी में गुड़ डालकर खाने से नेत्र-ज्योति बढ़ती है।

६. खट्टी डकारें -

गुड़, काला नमक मिलाकर चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं

७. स्त्री रोग-

तिल-गुड़ के लड्डू खाने से मासिक धर्म का रक्त निर्बाध गति से बहता है.

८.खांसी-

शरद ऋतु में गुड़ और काले तिल चबाने से  ब्रांकाइटिस रोग दूर होते हैं। ठंड के दिनों में गुड़, अदरक और तुलसी के पत्तों का काढ़ा बना कर गर्मागर्म पीना अच्छा रहता है। यह सर्दी-जुकाम से बचाता है. ठंड में चीनी के स्थान पर गुड़ खाइए. गुड़ पीला अमृत है. गुड़ में कैल्शियम मौजूद रहता है. पुराना गुड़ अधिक अच्छा माना जाता है।

९. एसिडिटी -

भोजन के पश्चात नित्य गुड़ की एक डली मुँह में रख कर चूसने से पाचन अच्छा होता है। साथ ही वायुविकार अर्थात गैसेस से भी मुक्ति मिलती है। एसिडिटी नहीं होती। एसिडिटी वालों को रोज प्रातःकाल थोड़ा सा गुड़ चूसना चाहिए।

१०. मूत्र विकार-

250 ग्राम पिसा जीरा और 125 ग्राम गुड़ को मिला कर गोलियाँ बना लें। दो-दो गोली प्रतिदिन दो बार खाने से मूत्र विकार में लाभ मिलता है। गुड़ को गुनगुने दूध में मिलाकर दिन में दो बार पीने से मूत्र खुल कर आता है।

११. शरीर बलिष्ट -

गुड़ और शुद्ध घी मिला कर खाने से शरीर बलिष्ट होता है। गुड़ की चाय चीनी की अपेक्षा अधिक स्वास्थ्यकर मानी जाती है। थकान मिटाने के लिए गुड़ का शर्बत पीएं.

१२. याद्दाश्त -

गुड़ खाने से याद्दाश्त कमजोर नहीं होती,  इसलिए अगर आप अपनी याद्दाश्त दुरुस्त रखना चाहते हैं, तो इसका नियमित सेवन करें.

१३. कम भूख -

अगर आपको कम भूख लगती है, तो इसका सेवन करें. इसका सेवन करने से भूख ज्यादा लगती है. हरड़ के चूर्ण में गुड़ मिलाकर खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है, और भूख ठीक से लगती है।

१४. ह्रदय रोग -

गुड़ में पोटैशियम होने के कारण यह हृदय रोगियों के लिये लाभकारी होता है, एवं कैल्शियम होने के कारण बच्चों के विकास में सहायक सिद्ध होता है।

१५ . पेट में कीड़े-

नीम की छाल को पानी में उबाल लें जब आठवां हिस्सा शेष बचे तो उसमें गुड़ मिलाकर रात में सेवन करने से मल के साथ कृमि बाहर निकल जाते हैं।

१६. दुर्बलता-

पुराने गुड़ का लड्डू बनाकर खाने से दुर्बलता दूर होती है, स्त्रियों में गर्भाशय की सफाई होकर नयी स्फूर्ति पैदा होती है।

१७. सिर का दर्द 

आधे सिर का दर्द होने पर 10 ग्राम गुड़ 5 ग्राम देशी घी में मिलाकर सूर्योदय से पहले सेवन करने से आराम होता है।

१८. बुखार -

एक-एक  दिन के अंतराल पर आने वाले बुखार में गुड़ और फिटकरी का चूर्ण बनाकर एक चम्मच सुबह शाम खाने से पुराना बुखार भी ठीक हो जाता है।

१९. अतिसार -

बेल के गूदे में गुड़ मिलाकर सेवन करने से अतिसार में लाभ होता है. दो पके हुये केले के गूदे में गुड़ और दही मिलाकर खाने से पेचिश दूर हो जाती है।

२०.अन्य-

आपको यदि मीठा खाने का शौक है तो च्युइंगम और चीनी के बजाए रोजाना थोड़ा गुड़ खाएं।

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सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः  

  सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् “ 

        शेष अगली पोस्ट में.....

प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में, 

आपका अपना,

डॉ.स्वास्तिक

चिकित्सा अधिकारी

(आयुष विभागउत्तराखंड शासन) 

(निःशुल्क चिकित्सा परामर्शजन स्वास्थ्य के लिए सुझावों तथा अन्य मुद्दों के लिए लेखक से drswastikjain@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है )

 



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